वैसे ज्यादा सोचने की बात तो नही मगर मुझे दुःख हुआ। तीन दिन के समय में भी तुमको राहुल से मिलने जन था। मै यहाँ किसके लिए रुक रहा हु। पता नही शायद।
और आज तुमने ये भी बोल दिया की तुम्हे मेरी परवाह नही है कैसे हुआ ये सब पता नही मगर अब है तो है।
कोई नै अब तो आदत सी है मुझके ऐसे जीने की।
अरे ऐसा लगा था की अपनी शादो होने जा रही है।
हहहहाहा
ख्वाब अच्छा था।
चलो ध्यान रखना अपना
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