Friday, October 2, 2009

क्या ये सच है

तुम जो हो तो गा रही है ये हवा, तुम जो हो तो रेशमी सी है फिजा
जाओ ना जाओ ना
आज मन में फ़िर उमंगो की दीए जलने लग गए जब आपने इत्मे प्यार से मुझसे बात करी। बिना बदल के ही आज मन के अन्दर एक मोर नाचने लगा सब कुछ कितना अच्छा है। ये aआंखे बिना बोले कुछ कहती जा रही है। इन हसीन बातों को ना रोकने का मन करता है इन प्यारी मुलाकातों से फ़िर जीने को मन करता है।
पता नही पर शायद मेरा प्यार आपके लिए बढ़ गया है और मुझे साथ रहना बहुत ही अच्छा लगता है।
आज अपना वो हाँथ में हाँथ पकड़ के कैम्पस में चलना और मेरा शर्माना इस पर से तुम्हारा कहना की अब तुम मेरे पास वापस आ जाओगी। मेरे दिल को गोल्डन दिल कहना और मई बहुत अच्छा हु। पर क्यूँ हूँ ये कब बताओगी।
इन हिचकोले खाती जिन्दगी को जैसे एक शहारा सा मिल गया है। काश ये केवल एक हसीन स्वप्न न हो। काश ये सच हो जाए।
अपुन तेरे को बहुत प्यार करता है रे

1 comment:

  1. वाह जी, क्या स्टाइल है इजहारे मुहब्बत का!! बेहतरीन.

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